कांग्रेस का अब तक का शासन काल भारत का दुर्भाग्य था..



स. प्र. ग सरकार ने वर्ष 2004से 2014 तक भारत पर 10 वर्षो तक शासन किया. अप्रत्यछ रूप से श्रीमती सोनिया गाँधी सत्ता मैं थी इसमे कोई संदेह नहीं है. इन 10 वर्षो की बात की जाये या कांग्रेस के अब तक के शासन की, क्या आप सहमत है की भारत को जिस तीव्र गति से विकास करना था वहा हुआ. हम ये नहीं कहते की अब तक कोई विकास नहीं हुआ किन्तु इस विकास की चाल अत्यंत मंद एवं कछुए की चाल की भांति थी.                                               
इसके पीछे के कारणों को जानने हेतु हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा. कांग्रेस नाम के दल की स्थापना 28 दिसम्बर 1885 को की गई थी, परन्तु इसका प्रारंभिक स्वरुप दबाब समूह के रूप मे था ना की राजनैतिक दल के रूप मे. इसकी स्थापना के पीछे का मुख्य कारण था 1857 के विद्रोह के पश्चात उभरी राष्ट्रीयता की भावना को समाप्त करना एवं देश की आजादी के आक्रोष की ज्वाला को कांग्रेस नाम के सगठन की स्थापना कर उस ज्वाला को ठंडा करना था. कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिशों द्वार अपना स्वार्थ सिद्ध करने व भारत पर लम्बे समय तक राज करने के उदेश्य से की गई थी. इसके पश्चात कॉंग्रेसी नेताओं ने हमेशा ब्रिटिशों के साथ उदार व्यवहार रखा.
आजादी के उपरांत भी कांग्रेस ने वही नीति अपनाई जो ब्रिटिश या अन्य विकसित देशों ने चाहा और यही कारण है की भारत की विकास की चाल मंद रही. आज भारत की बड़ी समस्या कश्मीर गाँधी परिवार की देन है और ऐसा कांग्रेस बाहरी देशों के दबाब मैं करती थी.
बाहरी शक्तियां जैसा चाहती थी उसी प्रकार देश चल रहा था.
प्रश्न बनता है की कांग्रेस इतनी दुर्बल एवं अन्य देशों के इशारे पर क्यों कार्य कर रही थी??

जबाब उसकी स्थापना मैं है दृष्टिगोचर होता है, कांग्रेस ने राष्ट्रभक्ति के स्थान पर स्वार्थ को महत्व दिया और ऐसा करने हेतु वहां देश को
दवा पर लगने से भी नहीं चुकी. आज भी  कांग्रेस इन्ही नीतिओ पर चलती है, बस इनको बदले मैं सत्ता की भूख है.

सत्ता के लिए कांग्रेस देश की एकता, अखंडता व संस्कृति को भी दवा पर लगा सकती है. यहाँ तक तो ठीक था परन्तु 2004 से 2014 के दौरान भारत की संस्कृति और अस्तित्व पर बादल छाने लगे. भारत को एक हिन्दू आतंकबादी राष्ट्र घोषित करने के प्रयास किये जाने लगे जो भारत की संस्कृति पर एक बड़ा खतरा साबित हो सकते थे.

2006 मैं समझौता एक्स्प्रेस ब्लास्ट, मालेगाव ब्लास्ट आदि के तहत कही ना कही भगवा आतंकबाद का नाम गड़ा गया. हमारी संस्कृति विश्व की महान सभ्य संस्कृति है,  वशुदेवकुटुम्ब जैसे सिद्धांत हमारी संस्कृति का आधार है. इतिहास गवाह है हम सदैव सभी धर्मो को साथ लेकर चले और हमने कभी भी किसी पर सामने से वार नहीं किया.
तो क्या हमारे साधु संतो पर इस प्रकार के आरोप लगा कर प्रताड़ित करना और वाह भी मानवीय धर्म की सभी सीमाएं लांघ कर, ये कहाँ तक उचित है.

 
परन्तु ये सब हुआ स.प्र. ग. सरकार के 10 वर्षो के कार्यकाल मैं भारत को एक हिन्दू आतंकवादी देश बनाने की कोशिशे की गई और ये दुर्भाग्य पूर्ण है की इन सब मैं हमारे ही बड़े नेता और सरकार शामिल थी,  स.प्र.ग सरकार को सत्ता चाहिए थी और बाहरी देश भारत के अस्तित्व को ही समाप्त कर देना चाहते थे.
किन्तु नियति की कुछ और ही मंजूर था और नियति ने देश की रक्षा व विकास की गति को तेज ले जाने हेतु मोदीजी के रूप मैं भारत को एक सशक्त प्रधानमंत्री दिया, जिन्होने राष्ट्र को प्रथम पायदान पर रखा और ना हीं वे किसी अन्य देश के दबाब मैं आते है और ना ही किसी देश का उन्हें भय है.
पिछले 5 वर्षो मैं विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र मैं उन्होंने काफी तीव्र गति से देश का विकास किया जो कांग्रेस पिछले 60 वर्षो मैं नहीं कर पाई तो यह कहना अतिशियोक्ति नहीं होगा.
अन्तः कांग्रेस के शासन काल की भूल को हम फिर मोदी सरकार को चुन कर सुधार सकते है, हमें देश के लिए मरने का मौका तो नहीं मिला परन्तु हम देश के लिए जी तो सकते है, नये भारत के निर्माण मैं अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु मतदान के दिन मत अवश्य दे.
जय हिन्द 

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