कोरोना वायरस आखिर किस का परिणाम....
विश्व में आज भय का पर्यायवाची कोरोना वायरस के रूप मैं सामने आया है. विश्व के समक्ष कई चुनोतिया और समस्याएं है...उनमे से दो सबसे बड़ी समस्याएं आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन है, दोनों ही समस्याएं मानव जगत के भविष्य पर प्रश्नचिह्न उठाती है।
वर्तमान समस्या कोरोना वायरस के बारे मैं बात करे तो कोरोना वायरस ऊपर वर्णित दोनों समस्याओं को पीछे छोड़ते हुए आज विश्व और मानव जगत के लिए सबसे बड़ी समस्या के रूप मैं उभरी है... यदि गौर से इस समस्या को देखा जाये तो यहां समस्या ऊपर वर्णित दोनों समस्याओं मैं से किसी एक से उभरी है।
या तो कोरोना आतंक, भय, और अपना वर्चस्व स्थापित करने हेतु एक जैविक हथियार है या फिर विश्व मैं मानव द्वारा प्रकर्ति के शोषण का परिणाम. कुछ तथ्य और जानकारी के आधार पर हम इन दोनों समस्याओं को समझने व उनसे उभरी कोरोना वायरस की संभावनाओ पर नजर डालते है।
सर्वप्रथम आतंक, और वर्चस्व के लिए यह एक जैविक हथियार के रूप में होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. इसके जैविक हथियार के रूप में उपयोग में लाने के लिए चीन व अमेरिका एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि यह जैविक हथियार के रूप में उनके देश के विरुद्ध उपयोग में लाया गया. सर्वप्रथम अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया कि यह वायरस चीन के बुहान स्तिथि P-4 लेब में तैयार किया गया, जो आज संपूर्ण विश्व के लिए खतरा बनके उभरा है।
अमेरिका को उत्तर देते हुए चाइना ने अपना पक्ष रखा कि यह वायरस अक्टूबर के मध्य में अमेरिकी सैनिकों द्वारा बुहान लाया गया परंतु तथ्यो के अभाव में यह निरर्थक लगता है।
अंतर्राष्ट्रीय अखबार "द वॉशिंगटन पोस्ट "और" द डेली मेल "सहित ऐसी कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में कोरोना वायरस को चीन के जैविक हथियार बनाने की कोशिशों के तौर पर जोड़ा गया है तथा इसे चीन के जैविक युद्ध कार्यक्रम का हिस्सा बताया गया।
1980 में लिखी गई पुस्तक" द अन रिस्ट्रिक्टेड वॉर"मैं इस बात का वर्णन किया गया कि चीन कथित तौर पर अपनी प्रयोगशाला में जैविक हथियार बना रहा है. दावा है कि बुहान में जब निमोनिया का पहला मामला नजर आया तो उसके कुछ दिन पहले ही चीन के उपराष्ट्रपति वांग किसान चुपचाप वहां पहुंचे थे. दावा किया गया कि वहां जैविक हथियारों की योजना की प्रगति देखने गए थे।
इजरायल सैन्य खुफिया अधिकारी का भी दावा है कि वायरस को चीन की बुहान स्थित जैविक प्रयोगशाला P4 में तैयार किया गया. आज चीन दावा कर रहा है कि वह समस्या से निकल चुका है और यदि वर्तमान स्थिति देखी जाए तो सबसे अधिक लाभ इसमें चीन का ही दिखाई पड़ता है।
लेख के दूसरे बिंदु पर नजर डाले तो इस बात को भी नहीं नाकारा जा सकता की यह मानव द्वारा पर्कृति का किया जा रहा शोषण, मानव की बढ़ती हवस, पर्यावरण का लगातार दूषित होना तथा पर्कृति के साथ खिलबाड़ भी इस समस्या का कारण हो सकता है. आज कोरोना के कारण विश्व की लगभग आधी आबादी लॉक डाउन है, वैश्विक अर्थव्यवस्था ठप हो चुकी है, दुनियाभर के उद्योगों के बंद होने से वायुमंडल को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों का उत्सर्जन बंद हुआ. वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक और निजी यातायात लगभग बंद होने से पेट्रोल और डीजल के कारण CO2 जैसी गैस निकलना कम हुई जिससे वातावरण शुद्ध हुआ, ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण में कमी आई. विश्व की सर्वाधिक प्रदूषण नदियां आज शुद्ध हो रही हैं. ओजोन परत मैं सुधार हो रहा है.... कारण जो भी हो वर्तमान में कोरोना हमें एक बड़ा सबक दे रहा है तथा पुनः अपनी जीवनशैली को व्यवस्थित करने की ओर इशारा कर रहा है।
विश्व आज गंभीर संकट से गुजर रहा है समय रहते यदि मानव ना चेता तो विनाश निश्चित है, चाहे यहां जैविक हथियार हो या प्रकृति का कोप दोनों ही कारणों के पीछे मानव की महत्वाकांक्षा है। अतः अवश्यकता है की मानव मानवता के साथ तथा प्रकृति के साथ समन्वय बना कर चले उसी मैं मानवता का हित है।


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