विचारों की शक्ति व उसके प्रभाव


                               


                                            विचार क्या है

इस मायावी संसार में दो चीजों का अस्तित्व प्रत्यक्ष रूप से परिलक्षित होता है....
एक प्रकृति जो इस मायावी संसार में हर ओर अपनी छटा बिखेरी हुई हैं नदियों, झरनों, वनों, पर्वतों के रूप में..इसे ईश्वर की कृति कहे या ईश्वर ने स्वयं को प्रकृति के रूप में निरूपित किया है। 
 
दूसरा यह भौतिक संसार जो मानव के मस्तिष्क में उठे विचारों का परिणाम है भौतिक संसार में निर्मित प्रत्येक छोटी से छोटी व बड़ी से बड़ी वस्तु जो इस भौतिक संसार को बनाने में योगदान देती है मानव के मस्तिष्क का ही परिणाम है...

अर्थात विचार मानव के मस्तिष्क में उठने वाली वे तरंगे है जो अत्यधिक शक्तिशाली है एक व्यक्ति अपने मस्तिष्क में एक विचार लाता है यह विचार ही है जो कर्म का पूर्व गामी है, कर्म से आदत और आदत से संस्कार का निर्माण होता है यह संस्कार ही है जो किसी व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं, यदि विचार सांसारिक है तो व्यक्ति भौतिकवादी हो जाता है, यदि विचार आध्यात्मिक हो तो व्यक्ति तर जाता है....

विचारों की शक्ति अनंत है विचार रोगों को ठीक कर सकता है, विचार व्यक्तियों की मानसिकता को बदल सकते हैं विचारों की शक्ति अकल्पनीय है...

एक साधारण उदाहरण से हम इनकी शक्ति को समझने का प्रयास करते हैं, प्रत्येक व्यक्ति इसे अधिक या कम मात्रा में अनुभव कर सकता है... जैसे मैंने अपने किसी पुराने मित्र के बारे में तीव्र भाव के साथ सोचा और विचार छोड़ा कि वह आजकल कहां है काफी समय से संपर्क नहीं हुआ, विचारों की गति प्रकाश से भी तेज है वो विचार मित्र तक पहुंचता है और वह मित्र उसी क्षण अपने उस मित्र को कॉल या संदेश प्रेषित करता है,ये छोटा सा उदहारण विचारों की शक्ति के छोटे से रूप को दर्शाता हैं। कोई भी व्यक्ति बड़े से बड़े लक्ष्य को अपने विचारों को दृढ़ निश्चय के साथ क्रियान्वित कर पूर्ण कर सकता है।

स्वामी विवेकानंद जी कहां है... कि एक विचार लो उस विचार को कि अपना जीवन बना लो उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो उस विचार को जियो अपने मस्तिष्क, मांसपेशियां, नशों शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो यही सफलता का मंत्र है।

                                                         विचारों के रूप


विचार सकारात्मक भी होते और नकारात्मक भी, शुद्ध विचारों का समूह सकारात्मक वातावरण का माहौल बनाता है जैसे व्यक्ति जब मंदिर, आश्रम, गिरजा घर, मस्जिद जाता है तो प्रार्थना रूपी शुद्ध विचार उसके मस्तिष्क में रहते हैं इसी प्रकार के विचारों का योग वहां शुद्ध वातावरण निर्मित करता है, यही कारण है कि हम ऐसे भक्ति पूर्ण स्थलों में अत्याधिक शांति को अनुभव करते हैं। शुद्ध विचारों में जहां दया, प्रेम, क्षमा, करुणा, प्रार्थना को शामिल किया जाता है वही अशुद्ध विचारों में क्रोध, लोभ, इर्षा, चिंता, भय, अंहम भाव इत्यादि आते हैं, इन विचारों का समूह उस स्थान पर नकारात्मक वातावरण को उत्पन्न करता है.. उदाहरण के तौर पर ज़ब हम किसी अस्पताल में जाते हैं तो वहां ऐसा महसूस करते हैं कि कब हम इस स्थान से निकले कारण अस्पताल का वातावरण नकारात्मक विचारों से प्रभावित होता है वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति दुख, पीड़ा, चिंता व दर्द से ग्रसित होने के कारण वहां का वातावरण शुद्ध नहीं रेहता, 
यही कारण हैं कि अधिकतर चिकित्सक चिड़चिड़े स्वाभाव  के होते हैं क्योंकि वे लगातार उसी विचार तरंगो में समय व्यतीत करते हैं।

                                                     विचारों का प्रभाव

जिस प्रकार विचारों के दो रूप होते हैं सकारात्मक और नकारात्मक, उसी प्रकार विचारों के प्रभाव भी दोनों प्रकार के होते हैं सकारात्मक व नकारात्मक। विचारों के प्रभाव को समझने हेतु विचारों को सूक्ष्मता से अवलोकन करना अत्यंत आवश्यक है..
कोई भी विचार तीन प्रकार से प्रतिक्रिया दे प्रभावित करता है, उदाहरण मुझे क्रोध आया मैंने अपने भीतर नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न की परिणाम स्वरूप कुछ समय के लिए मेरा व्यक्तित्व नकारात्मकता से भर गया कुछ क्षण पश्चात मेरा क्रोध तो चला गया परंतु पीछे क्रोध का संस्कार छूट गया जो पुनः बाहरी स्थिति से प्रभावित हो उत्पन्न होगा क्योंकि उस क्रोध के भाव ने क्रोध रूपी बीज को मेरे भीतर अंकुरित कर दिया। 
दूसरा जिस व्यक्ति पर मैंने क्रोध किया उसे नकारात्मक ऊर्जा प्रेषित की परिणाम वह व्यक्ति भी नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित हुआ..
तीसरा दो व्यक्तियों के प्रभावित होने के पश्चात इस ऊर्जा ने पूरे ब्रह्मांड को प्रभावित किया... इस प्रकार आपने इस ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा बनाने में अपना योगदान दिया..

इसी प्रकार हम सकारात्मक विचार के उदाहरण का प्रभाव देख सकते हैं...
दया, करुणा, प्रेम जैसे विचार ना केवल हमारे मन को शांत करने मैं सहयोगी हैं बल्कि सामने वाले में भी यही सकारात्मक विचारों का प्रभाव डालते हैं.. तथा तीसरा हम ब्रह्मांड के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा को प्रेषित करते हैं...

विचारों को शुद्ध करने हेतु प्रयोग-

• निरंतर विचारों का अवलोकन करना आरंभ करें।
• नकारात्मक विचारों के स्थान पर सकारात्मक विचारों को स्थान दें।
• अपने लक्ष्य को निर्धारित करें और उसी से संबंधित  विचारों में स्वयं को डुबो दें।
• निरंतर ध्यान और प्रार्थना से भी विचारों को  सकारात्मक रूप दिया जा सकता है।
• प्रेरणादायक पुस्तकों का अध्ययन विचारों को शुद्ध  करने में सहायक हैं।
• नकारात्मक विचारों के प्रति उदासीन रहे।



यह विचार ही है जो मनुष्य के मन में प्रकट हो कर्म का कारण बन संस्कारों को निर्मित करके व्यक्ति का चरित्र निर्माण करते हैं। जिस मनुष्य ने भी अपने विचारों को दिशा देकर जो कुछ पाना चाहा उसके लिए कुछ भी असंभव ना रहा चाहे वह आध्यात्मिक जगत के रहस्य हो या भौतिक जगत की उपलब्धियां। 

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