द केरला स्टोरी और सनातन
हाल ही में रिलीज हुई फ़िल्म 'द केरला स्टोरी' के कारण देश में जढ़े बना रही दो समस्या पुनः ज्वालित हो उठी 'लव जिहाद' और 'धर्मान्तरण' । इस लेख को लिखने का विचार मन में आया ज़ब एक न्यूज़ चैनल पर देखा कि किस प्रकार केरला में हिन्दू लड़कियों का मुस्लिम धर्म में धर्मान्तरण किया जाता हैं, धर्मान्तरण और लव जिहाद का यह मामला केवल केरला तक नहीं बल्कि छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार व उत्तर पूर्वी राज्यों तक भी तेजी से बड़ा हैं।
यहाँ प्रश्न उठता है कि जब हमारी भोली भाली लड़कियों और आदिवासी समाज को यह गलत तर्क दिया जाता है कि आप के सनातन धर्म में तो 33 करोड़ देवी देवता हैं इनका क्या अर्थ हैं, हम तो केवल एक आल्हा पर विश्वास करते है तो वही ईसाई पंथ का कहना हमारे यहाँ तो मात्र जीजस और क्रॉस को मान्यता, किन्तु आपके 33 करोड़ देव हास्य का विषय हैं।
सर्व प्रथम तो हमें यहाँ समझना होगा कि सनातन का अर्थ क्या हैं...?
सनातन अर्थात शाश्वत..जो सत्य है...अटल हैं...कल था आज है व सदैव रहेगा...जिसे झुठलाया नहीं जा सकता, वही शाश्वत हैं, सनातन हैं। इसी सनातन से आगे जा अन्य धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ, हिन्दू धर्म कि स्थापना हुई व कालांतर में मनुष्य ने समय के साथ अन्य पंथो कि स्थापना की । यदि ईश्वर, आल्हा और जीजस कि भी बात कि जाये तो ये हमारे द्वारा ही गड़े गए नाम मात्र हैं, किन्तु वह तो एक हैं, सर्वत्र हैं, सर्वज्ञ व सर्वव्यापक हैं, मनुष्य ने ही उसे विभिन्न नाम दें बाट दिया।
हाँ प्रश्न उठा आप 33 करोड़ देवी देवता को मानते हैं, हम एक आल्हा, एक जीजस में विश्वास रखते हैं वही सत्य हैं, सर्वशक्तिमान हैं, तथा हिन्दू व सनातन को उपहास उड़ाया जाता हैं। सनातन और हिन्दू धर्म में उल्लेखित 33 करोड़ देवों को इस प्रकार से समझें।
जैसे मनुष्य का शरीर हैं, शरीर हैं तो कई रोगों से भी समय समय पर ग्रसित होता हैं, किसी को ह्रदय से सम्बंधित रोग हैं, किसी को लिवर, किसी को किडनी, किसी को मधुमेह, किसी का सामान्य बुखार, किसी को जोड़ो का दर्द हैं इत्यादि।
अब आप से कहा जाये कि सरकार ने आप के रोग के इलाज हेतु एक स्थान बना दिया हैं, जाइये वहां सभी औषधियां उपलब्ध हैं आप ले लीजिये, जरा विचार करें आज हम जिस रोग के लिए औषधि चाहते है पर्थक से उपलब्ध नहीं हैं, यदि कोई कहे इस कक्ष में औषधियों का भंडारा हैं जाये अपने रोग से सम्बंधित औषधि को ढूढ अपना रोग ठीक करें, जरा कल्पना कीजिये आप के लिए कितना कठिन होगा।
सनातन धर्म में या हिन्दू धर्म में जो इसी से निकला हुआ सनातन का प्रमुख अंग या शाखा हैं, उसे इस प्रकार समझें कि उसने विभिन्न रोगों के लिए भिन्न भिन्न कक्ष कर दिए ताकि हम सरलता से अपने रोग कि औषधि पा कर स्वस्थ हो सकें।
इसी प्रकार से सनातन और हिन्दू धर्म में 33करोड़ देवी देवताओं का अर्थ हैं कि ईश्वर तो एक हैं किन्तु उसने स्वयं को विभिन्न ऊर्जा में प्रकट किया। जैसे जो व्यक्ति स्वयं को इस संसार में शक्ति के रूप में प्रतिष्ठि करना चाहता हैं तो दुर्गा व काली कि उपासना करें, बल शाली बनाना हैं तो हनुमान जी को पूजे , बुद्धि विवेक चाहिए तो सरस्वती कि उपासना करें, आध्यात्मिक मार्ग पर चल ईश्वर को पाना चाहते हो तो शिव कि आराधना करें ।
आप को पुरषों में उत्तम बनाना हैं तो श्री राम को जीवन में उतारो, लक्ष्मी चाहिए तो लक्ष्मी की पूजा करें । अतः ये जो हमारे विभिन्न देवी देवता हैं वह ऊर्जा के भिन्न भिन्न रूप हैं, आप इतने बड़े संसार में किस प्रकार अपने आप को ढाल कर किस रूप में स्वयं को स्थापित करना चाहते हैं या उस ईश्वर तक पहुंचना चाहते हैं, तो अपने लक्ष्य के अनुरूप ईश्वर के भिन्न भिन्न रूप कि उपासना कीजिए कोई विष्णु कि कर रहा है, कोई शिव, कोई शक्ति कि...इस तरह आप अपने लक्ष्य तक सरलता से पहुंच पाएंगे...यदि मैं कहूं वहां ईश्वरीय सम्पूर्ण ऊर्जा एक ही स्थान पर हैं जाये और अपने लक्ष्य को पाए तो यह आप के लिए अत्यंत कठिन होगा।
ये तो एक पहलू हुआ इसका दूसरा पहलु यह है कि 33 करोड़ देवी देवता अर्थात हम सनातनी इस बात पर विश्वास करते है कि ईश्वर एक हैं , सत्य एक हैं..उसने स्वयं को विघटीत कर सृष्टि के रूप मे निरुपित किया, अतः इस ब्रह्माण्ड, संसार के कण कण में ईश्वर व्याप्त हैं....
इसलिए हम वृक्ष, जीव जंतु, प्रर्णी, सर्प, बन्दर में भी ईश्वर को देखते, हम नदियों, सागर,पहाड़ व हिमालय में ईश्वर को देखते हैं और यही सत्य हैं.. ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं।
फ़िल्म में कहा गया कि आप का भगवान शिव अपनी पत्नी के देहांत पर सामान्य मनुष्य कि तरह रोता हैं।
इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमें सनातन धर्म कि गहराईयों में जाना होगा। वेद, उपनिषद, पुराणों में वर्णित तथ्यों को समझना आसान नहीं, हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने ब्रह्माण्ड के रहस्यों को बड़ी गोपनीयता के साथ पुराणों में के माध्यम से उजागर किया। पुराणों में वर्णित कथाओं को समझने हेतु वृहद अध्ययनऔर समझ चाहिए, आलोचना और उपहास हेतु मात्र मूढ़ता काफ़ी ।
अतः इस फ़िल्म ने समाज की एक बड़ी समस्या को पर्दे के माध्यम से हमारे समक्ष रखा, इस निर्भीक कदम के लिए निर्देशक प्रशंशा योग्य हैं ।अब हमारा कर्तव्य है कि इस मुद्दे से लोगों में सही समझ विकसित करें सनातन के सत्य से सब का परिचय कराएं।
यहाँ प्रश्न उठता है कि जब हमारी भोली भाली लड़कियों और आदिवासी समाज को यह गलत तर्क दिया जाता है कि आप के सनातन धर्म में तो 33 करोड़ देवी देवता हैं इनका क्या अर्थ हैं, हम तो केवल एक आल्हा पर विश्वास करते है तो वही ईसाई पंथ का कहना हमारे यहाँ तो मात्र जीजस और क्रॉस को मान्यता, किन्तु आपके 33 करोड़ देव हास्य का विषय हैं।
सर्व प्रथम तो हमें यहाँ समझना होगा कि सनातन का अर्थ क्या हैं...?
सनातन अर्थात शाश्वत..जो सत्य है...अटल हैं...कल था आज है व सदैव रहेगा...जिसे झुठलाया नहीं जा सकता, वही शाश्वत हैं, सनातन हैं। इसी सनातन से आगे जा अन्य धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ, हिन्दू धर्म कि स्थापना हुई व कालांतर में मनुष्य ने समय के साथ अन्य पंथो कि स्थापना की । यदि ईश्वर, आल्हा और जीजस कि भी बात कि जाये तो ये हमारे द्वारा ही गड़े गए नाम मात्र हैं, किन्तु वह तो एक हैं, सर्वत्र हैं, सर्वज्ञ व सर्वव्यापक हैं, मनुष्य ने ही उसे विभिन्न नाम दें बाट दिया।
हाँ प्रश्न उठा आप 33 करोड़ देवी देवता को मानते हैं, हम एक आल्हा, एक जीजस में विश्वास रखते हैं वही सत्य हैं, सर्वशक्तिमान हैं, तथा हिन्दू व सनातन को उपहास उड़ाया जाता हैं। सनातन और हिन्दू धर्म में उल्लेखित 33 करोड़ देवों को इस प्रकार से समझें।
जैसे मनुष्य का शरीर हैं, शरीर हैं तो कई रोगों से भी समय समय पर ग्रसित होता हैं, किसी को ह्रदय से सम्बंधित रोग हैं, किसी को लिवर, किसी को किडनी, किसी को मधुमेह, किसी का सामान्य बुखार, किसी को जोड़ो का दर्द हैं इत्यादि।
अब आप से कहा जाये कि सरकार ने आप के रोग के इलाज हेतु एक स्थान बना दिया हैं, जाइये वहां सभी औषधियां उपलब्ध हैं आप ले लीजिये, जरा विचार करें आज हम जिस रोग के लिए औषधि चाहते है पर्थक से उपलब्ध नहीं हैं, यदि कोई कहे इस कक्ष में औषधियों का भंडारा हैं जाये अपने रोग से सम्बंधित औषधि को ढूढ अपना रोग ठीक करें, जरा कल्पना कीजिये आप के लिए कितना कठिन होगा।
सनातन धर्म में या हिन्दू धर्म में जो इसी से निकला हुआ सनातन का प्रमुख अंग या शाखा हैं, उसे इस प्रकार समझें कि उसने विभिन्न रोगों के लिए भिन्न भिन्न कक्ष कर दिए ताकि हम सरलता से अपने रोग कि औषधि पा कर स्वस्थ हो सकें।
इसी प्रकार से सनातन और हिन्दू धर्म में 33करोड़ देवी देवताओं का अर्थ हैं कि ईश्वर तो एक हैं किन्तु उसने स्वयं को विभिन्न ऊर्जा में प्रकट किया। जैसे जो व्यक्ति स्वयं को इस संसार में शक्ति के रूप में प्रतिष्ठि करना चाहता हैं तो दुर्गा व काली कि उपासना करें, बल शाली बनाना हैं तो हनुमान जी को पूजे , बुद्धि विवेक चाहिए तो सरस्वती कि उपासना करें, आध्यात्मिक मार्ग पर चल ईश्वर को पाना चाहते हो तो शिव कि आराधना करें ।
आप को पुरषों में उत्तम बनाना हैं तो श्री राम को जीवन में उतारो, लक्ष्मी चाहिए तो लक्ष्मी की पूजा करें । अतः ये जो हमारे विभिन्न देवी देवता हैं वह ऊर्जा के भिन्न भिन्न रूप हैं, आप इतने बड़े संसार में किस प्रकार अपने आप को ढाल कर किस रूप में स्वयं को स्थापित करना चाहते हैं या उस ईश्वर तक पहुंचना चाहते हैं, तो अपने लक्ष्य के अनुरूप ईश्वर के भिन्न भिन्न रूप कि उपासना कीजिए कोई विष्णु कि कर रहा है, कोई शिव, कोई शक्ति कि...इस तरह आप अपने लक्ष्य तक सरलता से पहुंच पाएंगे...यदि मैं कहूं वहां ईश्वरीय सम्पूर्ण ऊर्जा एक ही स्थान पर हैं जाये और अपने लक्ष्य को पाए तो यह आप के लिए अत्यंत कठिन होगा।
ये तो एक पहलू हुआ इसका दूसरा पहलु यह है कि 33 करोड़ देवी देवता अर्थात हम सनातनी इस बात पर विश्वास करते है कि ईश्वर एक हैं , सत्य एक हैं..उसने स्वयं को विघटीत कर सृष्टि के रूप मे निरुपित किया, अतः इस ब्रह्माण्ड, संसार के कण कण में ईश्वर व्याप्त हैं....
इसलिए हम वृक्ष, जीव जंतु, प्रर्णी, सर्प, बन्दर में भी ईश्वर को देखते, हम नदियों, सागर,पहाड़ व हिमालय में ईश्वर को देखते हैं और यही सत्य हैं.. ईश्वर सर्वत्र व्याप्त हैं।
फ़िल्म में कहा गया कि आप का भगवान शिव अपनी पत्नी के देहांत पर सामान्य मनुष्य कि तरह रोता हैं।
इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमें सनातन धर्म कि गहराईयों में जाना होगा। वेद, उपनिषद, पुराणों में वर्णित तथ्यों को समझना आसान नहीं, हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने ब्रह्माण्ड के रहस्यों को बड़ी गोपनीयता के साथ पुराणों में के माध्यम से उजागर किया। पुराणों में वर्णित कथाओं को समझने हेतु वृहद अध्ययनऔर समझ चाहिए, आलोचना और उपहास हेतु मात्र मूढ़ता काफ़ी ।
अतः इस फ़िल्म ने समाज की एक बड़ी समस्या को पर्दे के माध्यम से हमारे समक्ष रखा, इस निर्भीक कदम के लिए निर्देशक प्रशंशा योग्य हैं ।अब हमारा कर्तव्य है कि इस मुद्दे से लोगों में सही समझ विकसित करें सनातन के सत्य से सब का परिचय कराएं।
Very good thanks.
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