स्वप्न
आज प्रातः ज़ब नींद खुली तो एक ऐसा स्वप्न आया जिसने मुझे सपनों के विषय पर सोचने के लिए बाध्य किया। सपने में ऐसे मित्र को पाया जिससे लम्बे वर्षों से कोई संपर्क नहीं हैं एवं वर्षों से उसका विचार तक नहीं किया।
बस सपने से जागने के पश्चायत कई प्रश्नन मन में उठे, और इन्ही प्रश्ननों को खोजते खोजते इस लेख में, मैं अपने व्यक्तिगत अनुभवों को आप के साथ साझा कर, सपनों से जुड़े उत्तरों को तथ्य और वैज्ञानिक आधारों पर देखने का प्रयास करेंगे।
* सपने क्या हैं ?
* सपने क्यों आते हैं ?
* इनका क्या महत्व हैं ?
* क्या सपनों के महत्व को जान कर जीवन के कुछ
अनसुलझे प्रश्ननों के उत्तर प्राप्त किये जा सकते हैं ?
सपना एक ऐसा विषय हैं जिसमें हर किसी व्यक्ति को रूचि हैं क्योंकि हर व्यक्ति को भिन्न भिन्न प्रकार के सपने आते हैं और स्वभाविक हैं की व्यक्ति इन से जुड़े रहस्यों को जानना चाहता हैं।
सपने क्या हैं -
सपने क्या इसे जानने से पूर्व हमें मन और मन की अवस्था के विषय में ज्ञात होना अत्यंत आवश्यक हैं। मन की मुख्यतः दो अवस्थाएं हैं - जाग्रत और स्वप्न।
मन जो निरंतर गतिशील हैं। आप कही पर एकांत में बैठ भी जाये तो आप देखेंगे की मन शांत नहीं होता निरंतर शब्दों के जाल में फसा रहता हैं। यह अत्यंत चंचल हैं एक सेकंड के लिए भी इसे स्थिर रहना पसंद नहीं। या तो अतीत को सोच ग्लानि करेगा या भविष्य की चिंता में रह कर कल्पना। वर्तमान में मन को रहना पसंद नहीं क्यूंकि वर्तमान में रहना अर्थात स्थिरता। मन की यही जागरण अवस्था मन की 'जाग्रत' अवस्था हैं।
ज़ब मन अपनी जाग्रत अवस्था में गतिशील रहता हैं तो यह अपने द्वारा किये गए प्रतेक पल और झण में प्राप्त अनुभवों को याददास के रूप में संग्रहित करता जाता हैं। जहाँ यह सब यादें संग्रहित होती हैं वह हैं मन की दूसरी अवस्था अवचेतन मन। इसे एक सरल उदाहरण से समझें जैसे हम ज़ब अपने मोबइल से फोटोज क्लिक करते हैं, या व्हाट्सप्प, फेसबुक, किसी और साइट से फोटोज लेते हैं तो वे सभी फोटोज खुद व खुद गैलरी में जाकर सेव होती जाती हैं।
बस इसी प्रकार मन जो कुछ भी देखता हैं, सुनता हैं, पड़ता हैं, समझता हैं वह हमारे अवचेतन मन में संग्रहित होता जाता हैं। अंतर मात्र इतना हैं की मोबाइल की संग्रहण करने की एक सीमा हैं किन्तु अवचेतन मन की नहीं इसके भीतर संग्रहित यादों में ना केबल एक दिन बल्कि इस जन्म और असंख्य जन्मों की यादें संस्कार संग्रहित हैं। वो बात अलग हैं की हम उन्हें विसमृत कर चुके हैं। इसका अर्थ यह नहीं की अवचेतन मन भूल गया।
इस जन्म की भी सभी स्मृतियाँ हमें स्मरण नहीं हैं जैसे जैसे समय बीतता जाता हैं स्मृति भी धुंधली हो कर विस्मिरत होने लग जाती हैं। हमें वही स्मृतियाँ स्मरण रहती हैं जिन्होंने हमारे चित्त पर गहरा प्रभाव डाला हो। अन्य के साथ ऐसा होता हैं की जैसे ही उस स्मृति से सबंधित कुछ देखा या सुना तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। उदाहरण आपने यू-ट्यूब या गूगल पर कुछ सर्च किया तो वह उस से सम्बंधित अन्य जानकारी और विडिओ भी आप के साथ साझा करना प्रारम्भ कर देता हैं। बस इसी प्रकार हमारा मन कार्य करता हैं। जाग्रत अवस्था में चेतन मन सक्रिय रहता हैं और हमारे सोते ही अवचेतन मन पूरी तरह से सक्रिय हो जाता हैं और सपने आना आरम्भ हो जाते हैं।
होता क्या हैं, अब अवचेतन मन अपने संग्रहित स्मृतियों में से कोई भी याद निकलता हैं और एक विडिओ की तरह हमारे समक्ष सपना बन कर आता हैं। समस्या अवचेतन मन के साथ यह है की उसके पास असंख्य स्मृति अवश्य हैं किन्तु यह व्यवस्थित नहीं।
इसलिय कोई भी चित्र कही भी जुड़ ऐसा विचित्र सपना कभी कभी बन जाता हैं जिसके बारे में हमने ना कभी विचार किया, ना देखा, ना सोचा। अब तक के लेख में हमने देखा सपने क्या, कैसे आते हैं और अब हम जानेगे इनका महत्व क्या हैं ?
यदि अवचेतन मन ऐसे कार्य करता हैं तो, तो यह महत्व हीन हैं, किन्तु नहीं इसका महत्व है और गहरा महत्व है, यह बहुत शक्तिशाली हैं। क्यूंकि यह अवचेतन मन ही जो हमारा अतीत भी जनता हैं और उसके पास भविष्य की भी जानकारी हैं।
आप सोचेंगे अतीत तो ठीक हैं क्योंकि इसके पास इस जन्म से लेकर पूर्व के कई जन्मों की स्मृतियाँ संग्रहित हैं। किन्तु यह भविष्य कैसे जान सकता हैं।
इसे हम ऐसे समझें की जो अतीत में किये गए कर्म के संस्कार चित्त में संग्रहित हैं, उन्ही के आधार पर मनुष्य नये कर्म करता है और अपना भविष्य तय करता हैं चुकी अतीत के संस्कारों को ही आधार बना नये कर्म होते, इसलिए 99.99% कर्म पूर्व से निर्धारित हैं और इन्ही को माध्यम बना अवचेतन मन द्वारा भविष्य को भी जाना जा सकता हैं।
तो हमने अवचेतन मन की शक्ति को जाना, उसके पास भूत भी हैं और भविष्य भी, यदि हम इसे व्यवस्थित कर दे तो बाकई बहुत कुछ ज्ञात किया जा सकता हैं।
इसे व्यवस्थित करने का एक मात्र साधन है 'साधना', जिसके तहत मन को स्थिर कर सिर्फ वर्तमान को साधना होगा। साधना क्या हैं ? कैसे करें इसके विषय में हम पूर्व में दो-तीन लेखों में चर्चा कर चुके हैं।
इस तरह अवचेतन मन को व्यवस्थित कर के सपनों को माध्यम बना इसके महत्व को सिद्ध कर बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता हैं। वर्तमान में चर्चा में चल रहे 'टाइम ट्रेवल' की थ्योरी को भी चरितार्थ किया जा सकता हैं।
बस सपने से जागने के पश्चायत कई प्रश्नन मन में उठे, और इन्ही प्रश्ननों को खोजते खोजते इस लेख में, मैं अपने व्यक्तिगत अनुभवों को आप के साथ साझा कर, सपनों से जुड़े उत्तरों को तथ्य और वैज्ञानिक आधारों पर देखने का प्रयास करेंगे।
* सपने क्या हैं ?
* सपने क्यों आते हैं ?
* इनका क्या महत्व हैं ?
* क्या सपनों के महत्व को जान कर जीवन के कुछ
अनसुलझे प्रश्ननों के उत्तर प्राप्त किये जा सकते हैं ?
सपना एक ऐसा विषय हैं जिसमें हर किसी व्यक्ति को रूचि हैं क्योंकि हर व्यक्ति को भिन्न भिन्न प्रकार के सपने आते हैं और स्वभाविक हैं की व्यक्ति इन से जुड़े रहस्यों को जानना चाहता हैं।
सपने क्या हैं -
सपने क्या इसे जानने से पूर्व हमें मन और मन की अवस्था के विषय में ज्ञात होना अत्यंत आवश्यक हैं। मन की मुख्यतः दो अवस्थाएं हैं - जाग्रत और स्वप्न।
मन जो निरंतर गतिशील हैं। आप कही पर एकांत में बैठ भी जाये तो आप देखेंगे की मन शांत नहीं होता निरंतर शब्दों के जाल में फसा रहता हैं। यह अत्यंत चंचल हैं एक सेकंड के लिए भी इसे स्थिर रहना पसंद नहीं। या तो अतीत को सोच ग्लानि करेगा या भविष्य की चिंता में रह कर कल्पना। वर्तमान में मन को रहना पसंद नहीं क्यूंकि वर्तमान में रहना अर्थात स्थिरता। मन की यही जागरण अवस्था मन की 'जाग्रत' अवस्था हैं।
ज़ब मन अपनी जाग्रत अवस्था में गतिशील रहता हैं तो यह अपने द्वारा किये गए प्रतेक पल और झण में प्राप्त अनुभवों को याददास के रूप में संग्रहित करता जाता हैं। जहाँ यह सब यादें संग्रहित होती हैं वह हैं मन की दूसरी अवस्था अवचेतन मन। इसे एक सरल उदाहरण से समझें जैसे हम ज़ब अपने मोबइल से फोटोज क्लिक करते हैं, या व्हाट्सप्प, फेसबुक, किसी और साइट से फोटोज लेते हैं तो वे सभी फोटोज खुद व खुद गैलरी में जाकर सेव होती जाती हैं।
बस इसी प्रकार मन जो कुछ भी देखता हैं, सुनता हैं, पड़ता हैं, समझता हैं वह हमारे अवचेतन मन में संग्रहित होता जाता हैं। अंतर मात्र इतना हैं की मोबाइल की संग्रहण करने की एक सीमा हैं किन्तु अवचेतन मन की नहीं इसके भीतर संग्रहित यादों में ना केबल एक दिन बल्कि इस जन्म और असंख्य जन्मों की यादें संस्कार संग्रहित हैं। वो बात अलग हैं की हम उन्हें विसमृत कर चुके हैं। इसका अर्थ यह नहीं की अवचेतन मन भूल गया।
इस जन्म की भी सभी स्मृतियाँ हमें स्मरण नहीं हैं जैसे जैसे समय बीतता जाता हैं स्मृति भी धुंधली हो कर विस्मिरत होने लग जाती हैं। हमें वही स्मृतियाँ स्मरण रहती हैं जिन्होंने हमारे चित्त पर गहरा प्रभाव डाला हो। अन्य के साथ ऐसा होता हैं की जैसे ही उस स्मृति से सबंधित कुछ देखा या सुना तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। उदाहरण आपने यू-ट्यूब या गूगल पर कुछ सर्च किया तो वह उस से सम्बंधित अन्य जानकारी और विडिओ भी आप के साथ साझा करना प्रारम्भ कर देता हैं। बस इसी प्रकार हमारा मन कार्य करता हैं। जाग्रत अवस्था में चेतन मन सक्रिय रहता हैं और हमारे सोते ही अवचेतन मन पूरी तरह से सक्रिय हो जाता हैं और सपने आना आरम्भ हो जाते हैं।
होता क्या हैं, अब अवचेतन मन अपने संग्रहित स्मृतियों में से कोई भी याद निकलता हैं और एक विडिओ की तरह हमारे समक्ष सपना बन कर आता हैं। समस्या अवचेतन मन के साथ यह है की उसके पास असंख्य स्मृति अवश्य हैं किन्तु यह व्यवस्थित नहीं।
इसलिय कोई भी चित्र कही भी जुड़ ऐसा विचित्र सपना कभी कभी बन जाता हैं जिसके बारे में हमने ना कभी विचार किया, ना देखा, ना सोचा। अब तक के लेख में हमने देखा सपने क्या, कैसे आते हैं और अब हम जानेगे इनका महत्व क्या हैं ?
यदि अवचेतन मन ऐसे कार्य करता हैं तो, तो यह महत्व हीन हैं, किन्तु नहीं इसका महत्व है और गहरा महत्व है, यह बहुत शक्तिशाली हैं। क्यूंकि यह अवचेतन मन ही जो हमारा अतीत भी जनता हैं और उसके पास भविष्य की भी जानकारी हैं।
आप सोचेंगे अतीत तो ठीक हैं क्योंकि इसके पास इस जन्म से लेकर पूर्व के कई जन्मों की स्मृतियाँ संग्रहित हैं। किन्तु यह भविष्य कैसे जान सकता हैं।
इसे हम ऐसे समझें की जो अतीत में किये गए कर्म के संस्कार चित्त में संग्रहित हैं, उन्ही के आधार पर मनुष्य नये कर्म करता है और अपना भविष्य तय करता हैं चुकी अतीत के संस्कारों को ही आधार बना नये कर्म होते, इसलिए 99.99% कर्म पूर्व से निर्धारित हैं और इन्ही को माध्यम बना अवचेतन मन द्वारा भविष्य को भी जाना जा सकता हैं।
तो हमने अवचेतन मन की शक्ति को जाना, उसके पास भूत भी हैं और भविष्य भी, यदि हम इसे व्यवस्थित कर दे तो बाकई बहुत कुछ ज्ञात किया जा सकता हैं।
इसे व्यवस्थित करने का एक मात्र साधन है 'साधना', जिसके तहत मन को स्थिर कर सिर्फ वर्तमान को साधना होगा। साधना क्या हैं ? कैसे करें इसके विषय में हम पूर्व में दो-तीन लेखों में चर्चा कर चुके हैं।
इस तरह अवचेतन मन को व्यवस्थित कर के सपनों को माध्यम बना इसके महत्व को सिद्ध कर बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता हैं। वर्तमान में चर्चा में चल रहे 'टाइम ट्रेवल' की थ्योरी को भी चरितार्थ किया जा सकता हैं।
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