ऊर्जा स्थलों का पुनरुद्धार
इस लेख में आध्यात्म और राजनीति दोनों क्षेत्रों को समन्वय बना कर लिखा गया हैं। सनातन धर्म में ऊर्जा स्थलों का अत्याधिक महत्व हैं। सर्वप्रथम प्रश्न बनता हैं की यह ऊर्जा स्थल है क्या..?
ऊर्जा स्थल अर्थात ऐसे स्थल जहाँ प्रत्यक्ष रूप से सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता या सार्थकता को पाया जा सकता हैं।
भारत एक ऐसा देश हैं जहाँ इन स्थलों को शक्ति पीठ, ज्योतिर्लिंग, चार धाम और विभिन्न मंदिरों और तीर्थ के रूप में जाना जाता हैं। यहीं कारण रहा की हमारे प्राचीन ऋषि मनीषीयों ने इन स्थलों को धर्म से जोड़ तीर्थ स्थल का दर्ज़ा दिया। ताकि व्यक्ति इसी बहाने यहाँ पहुंचे और इन स्थलों से ऊर्जा पाकर जीवन को सही दिशा देकर परमार्थ की ओर बड़े।
किन्तु हमने देखा पिछले कुछ सदियों से यह स्थल अपने स्थान पर तो रहें किन्तु इनकी अवस्था में निरंतर गिरावट चिंता का विषय रहा सभी के लिए। आजादी के उपरांत भी इन स्थलों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया और यदि यही स्थिति बनी रहती तो आने वाले कुछ वर्षों में यह स्थल लुप्त होने की कगार पर भी पहुंच सकते थे।
किन्तु कहा गया हैं ईश्वर के पास देर है अंधेर नहीं। ज़ब सात वी सादी में कर्म काण्ड और बौद्ध धर्म का प्रचार जोरों पर था और वेदांत पर संकट छाया तो महापुरुष के रूप में आदि गुरु शांकचार्य जी आये और वेदों का प्रचार प्रसार कर उन्हें पुनः स्थापित किया। साथ ही चार धामों की स्थापना की ।
19वीं सादी में ज़ब भारत आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब पुनः भारतीय अपनी संस्कृति, शिक्षा व सभ्यता को विसमृत कर चुके थे। जिन्हें इस बार पुनः इस सदी में स्थापित करने का श्रेय जाता हैं वे हैं स्वामी विवेकानंद जी, उन्होंने ना सिर्फ भारतीयों को अपनी संस्कृति व सभ्यता हेतु जाग्रत किया बल्कि विश्व को भी भारत की सभ्यता और संस्कृति से पुरजोर माध्यम से परिचित कराया |
बस इसी प्रकार आज इस युग में भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री जी श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन ऊर्जा स्थलों का पुनरुद्धार कर एक बड़ा, महत्वपूर्ण और कल्याणकारी कार्य किया जा रहा हैं। जिन स्थलों का अब तक पुनरुद्धार किया जा चूका हैं, वे हैं - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग , बाबा विश्व नाथ ज्योतिर्लिंग, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ धाम, पावा नाथ शक्ति पीठ, ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग (निर्माणधीन ), श्री राम मंदिर (अयोध्या ) इत्यादि।
इन स्थलों का पुनरुद्धार ना सिर्फ वर्तमान के परिपेक्ष में कल्याणकारी हैं बल्कि इसका लाभ सदियों तक आने वाली पीड़ियों को प्राप्त होता रहेगा। अगर राजनैतिक दृष्टिकोण से देखे तो विपक्ष के अनुसार तो यह सनातन को आधार बना कर हिन्दू वोटो को साधने का प्रयास हैं। किन्तु जिस प्रकार इस लेख में इन स्थलों के पुनरुद्धार के महत्व को दर्शाया गया उस दृष्टि को देखते हुए यह महान कार्य महान आत्माओं और महान पुरुष द्वारा ही संभव हैं, जिसका वंदन आने वाला समय उसी प्रकार से करेगा जिस प्रकार से अन्य वृहद सुधारकों को करता हैं।
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