विचारों का प्रवाह
कभी आप ने सोचा है की सोशल मीडिया साइट पर आप को वही कन्टेट दिखाया जाता है जो आप देखना चाहते हैं। उदाहरण यू ट्यूब पर एक दो बार हम जिस प्रकार के विडिओ देखते हैं वैसा या उसे से सम्बंधित कंटेंट हमें परोसा जाने लगता हैं। जैसे आप कोई विशेष व्यक्ति या विषय से सम्बंधित न्यूज़ देखते है तो उसी प्रकार के विडिओ आप की साइट पर देखे जा सकते हैं । बच्चे कार्टून देखते हैं तो उसी प्रकार के विडिओ आने लगते हैं इत्यादि। यहाँ प्रक्रिया केबल यू ट्यूब पर नहीं बल्कि फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि आदि साइट्स पर भी देखने को मिलती हैं। या यूँ कहें की इन साइट्स ने हमारे मन-मस्तिष्क की प्रक्रिया को वर्ल्ड वाइड वेब पर अपनाया। अब आप सोचेंगे ये मैं क्या कह रही हूं।
जी ये क्रिया मात्र सोशल साइट तक सिमित नहीं बल्कि विचार करें तो हमारा मन या मस्तिष्क ब्रह्माण्ड से वैसे ही विचार ग्रहण करता है जैसी हमारे सूक्ष्म शरीर की वासनायें होती हैं और यही विचार व्यक्ति का जीवन, चरित्र और आगे का रास्ता तय करते हैं।
उदाहरण एक वैज्ञानिक की इच्छा के अनुरूप उस का मस्तिष्क काम करता है, ब्रह्माण्ड में उपस्थित वह विचार ग्रहण करता है और ये विचार ही बड़ी बड़ी खोज और अविष्कार का कारण बनते हैं। विश्व के अब तक के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक निकोल टेलसा ने अपने आखरी समय के इंटरव्यू में विचारों से सम्बंधित अपने अनुभवों को विश्व के साथ साझा किया। ज़ब रिपोर्ट ने पूछा की आप ने अपने अविष्कार के माध्यम से विश्व व मानव जगत को बड़ा त्योंफा दिया, आप को कैसा अनुभव होता हैं ये जाना कर....
इसके उत्तर में उन्होंने कहा जो भी विचार मेरे मस्तिष्क में आते है वो मेरे नहीं इस ब्रह्माण्ड की देन, यहाँ तक आरम्भ में ज़ब मैं रात्रि सोने के लिए जाता था उसी दौरान विचार आते थे, इसलिए में प्रतेक रात डायरी और पेन अपने समीप रख के सोता विचार आते उन्हें लिखता, व्यवहार में लता और अविष्कार हो गया, अतः मैं तो एक सामन्य नागरिक हूं मेरा इस में कोई योगदान नहीं सिर्फ माध्यम हूं, उन्होंने यहाँ तक बताया की अब तक इसी प्रक्रिया के तहत अविष्कारों ने ही मानव जीवन को विकासउन्मुख बनाया। इसी प्रकार लेखक के विचार श्रेष्ठ कृतियों को जन्म देते हैं। निर्देशक की इच्छा इसी प्रकार उत्कृष्ट फिल्मों का निर्माण करती हैं। एक साधक इसी प्रकार पवित्र विचारों को ग्रहण कर निर्विचार हो उस सर्वोच्च सत्य को प्राप्त कर सकता है जो प्रतेक मनुष्य और जीव आत्मा का अंतिम धैय हैं।
हमारे विचारों का प्रवाह कई बातों पर निर्भर करता हैं ....
* आंतरिक वासानायें :- प्रतेक व्यक्ति का जीवन उसी दिशा में गमन करता हैं जिस प्रकार के उसके विचार होते और विचार हमारे सूक्ष्म से सूक्ष्म आंतरिक वासनाओं पर निर्भर हैं, ये अत्यंत रहस्यमी माध्यम से काम करते हैं और यही कारण है अज्ञान मनुष्य इस बात को समझ ही नहीं पाता।
* आस - पास का वातावरण :- आप के आस पास का वातावरण भी अत्यंत मायने रखता हैं उसी प्रकार की ऊर्जा को हम ग्रहण करते हैं और विचार भी उसी दिशा में बह चलते हैं।
* संगत :- संगत का प्रत्यक्ष प्रभाव मन पर पड़ता हैं और मन उसी दिशा में विचारो को लेता हैं।
* इन्द्रियां क्या ग्रहण करती हैं :- इन्द्रियां क्या देख रही हैं , सुन रही हैं, बोल रही हैं इन्ही के अर्जित ज्ञान से मन जानकारी ग्रहण करता हैं और उसी प्रकार की इच्छा को अर्जित कर वैसे ही विचारों के प्रवाह को आपनता हैं।
* मन की एकाग्रता :- एकाग्र मन गति के साथ लक्ष्य को भेदता हैं, यही कारण हैं एकाग्र मन तेजी से श्रेष्ठ विचारों को पाता हैं।
* संस्कारों के अनुरूप विचार :- संस्कार भी आप के विचारों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते एक प्रकार से संस्कार पर ही आंतरिक वासानायें निर्भर करती हैं।
विचारों के प्रवाह का सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव :-
सकारात्मक प्रभाव :-
..सकारात्मक विचार उच्च चरित्र निर्माण हेतु मूलभूत आवश्यकता हैं।
.. संसार के सभी महान पुरुषों की सफलताओं के मूल में उनका चिंतन ही रहा हैं।
.. दृणनिश्चय और लक्ष्य पूर्ण विचार योजना क्रियानव्यान के सूचक हैं।
नकारात्मक प्रभाव :-
.. आज समाज में जितनी भी विसंगतियाँ , विकृतियाँ, परिवार में कलेश, मनुष्य का अपने पथ से गमन सभी नकारात्मक विचारों का परिणाम हैं।
.. व्यर्थ और विकृत चिंतन मनुष्य के पतन का कारक हैं।
जी ये क्रिया मात्र सोशल साइट तक सिमित नहीं बल्कि विचार करें तो हमारा मन या मस्तिष्क ब्रह्माण्ड से वैसे ही विचार ग्रहण करता है जैसी हमारे सूक्ष्म शरीर की वासनायें होती हैं और यही विचार व्यक्ति का जीवन, चरित्र और आगे का रास्ता तय करते हैं।
उदाहरण एक वैज्ञानिक की इच्छा के अनुरूप उस का मस्तिष्क काम करता है, ब्रह्माण्ड में उपस्थित वह विचार ग्रहण करता है और ये विचार ही बड़ी बड़ी खोज और अविष्कार का कारण बनते हैं। विश्व के अब तक के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक निकोल टेलसा ने अपने आखरी समय के इंटरव्यू में विचारों से सम्बंधित अपने अनुभवों को विश्व के साथ साझा किया। ज़ब रिपोर्ट ने पूछा की आप ने अपने अविष्कार के माध्यम से विश्व व मानव जगत को बड़ा त्योंफा दिया, आप को कैसा अनुभव होता हैं ये जाना कर....
इसके उत्तर में उन्होंने कहा जो भी विचार मेरे मस्तिष्क में आते है वो मेरे नहीं इस ब्रह्माण्ड की देन, यहाँ तक आरम्भ में ज़ब मैं रात्रि सोने के लिए जाता था उसी दौरान विचार आते थे, इसलिए में प्रतेक रात डायरी और पेन अपने समीप रख के सोता विचार आते उन्हें लिखता, व्यवहार में लता और अविष्कार हो गया, अतः मैं तो एक सामन्य नागरिक हूं मेरा इस में कोई योगदान नहीं सिर्फ माध्यम हूं, उन्होंने यहाँ तक बताया की अब तक इसी प्रक्रिया के तहत अविष्कारों ने ही मानव जीवन को विकासउन्मुख बनाया। इसी प्रकार लेखक के विचार श्रेष्ठ कृतियों को जन्म देते हैं। निर्देशक की इच्छा इसी प्रकार उत्कृष्ट फिल्मों का निर्माण करती हैं। एक साधक इसी प्रकार पवित्र विचारों को ग्रहण कर निर्विचार हो उस सर्वोच्च सत्य को प्राप्त कर सकता है जो प्रतेक मनुष्य और जीव आत्मा का अंतिम धैय हैं।
हमारे विचारों का प्रवाह कई बातों पर निर्भर करता हैं ....
* आंतरिक वासानायें :- प्रतेक व्यक्ति का जीवन उसी दिशा में गमन करता हैं जिस प्रकार के उसके विचार होते और विचार हमारे सूक्ष्म से सूक्ष्म आंतरिक वासनाओं पर निर्भर हैं, ये अत्यंत रहस्यमी माध्यम से काम करते हैं और यही कारण है अज्ञान मनुष्य इस बात को समझ ही नहीं पाता।
* आस - पास का वातावरण :- आप के आस पास का वातावरण भी अत्यंत मायने रखता हैं उसी प्रकार की ऊर्जा को हम ग्रहण करते हैं और विचार भी उसी दिशा में बह चलते हैं।
* संगत :- संगत का प्रत्यक्ष प्रभाव मन पर पड़ता हैं और मन उसी दिशा में विचारो को लेता हैं।
* इन्द्रियां क्या ग्रहण करती हैं :- इन्द्रियां क्या देख रही हैं , सुन रही हैं, बोल रही हैं इन्ही के अर्जित ज्ञान से मन जानकारी ग्रहण करता हैं और उसी प्रकार की इच्छा को अर्जित कर वैसे ही विचारों के प्रवाह को आपनता हैं।
* मन की एकाग्रता :- एकाग्र मन गति के साथ लक्ष्य को भेदता हैं, यही कारण हैं एकाग्र मन तेजी से श्रेष्ठ विचारों को पाता हैं।
* संस्कारों के अनुरूप विचार :- संस्कार भी आप के विचारों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते एक प्रकार से संस्कार पर ही आंतरिक वासानायें निर्भर करती हैं।
विचारों के प्रवाह का सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव :-
सकारात्मक प्रभाव :-
..सकारात्मक विचार उच्च चरित्र निर्माण हेतु मूलभूत आवश्यकता हैं।
.. संसार के सभी महान पुरुषों की सफलताओं के मूल में उनका चिंतन ही रहा हैं।
.. दृणनिश्चय और लक्ष्य पूर्ण विचार योजना क्रियानव्यान के सूचक हैं।
नकारात्मक प्रभाव :-
.. आज समाज में जितनी भी विसंगतियाँ , विकृतियाँ, परिवार में कलेश, मनुष्य का अपने पथ से गमन सभी नकारात्मक विचारों का परिणाम हैं।
.. व्यर्थ और विकृत चिंतन मनुष्य के पतन का कारक हैं।
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