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Showing posts from November, 2024

शिव का स्वरुप

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अक्सर अपने सवालों के उत्तर खोजने के लिए मैं प्रत्यनशील रहती, कभी किसी माध्यम से कभी किसी,अधिकांश आतंरिकता से निकले उत्तर मेरे जबाब रहते। उत्तर वही जो आपको स्तुष्ट कर दें। सोसल मिडिया साइट पर आध्यात्म से संबधित पुस्तक लेख खोजती रहती हूँ। एक लेख में मैनें पड़ा परमात्मा का कोई रूप नहीं जहाँ के जैसे निवासी उसी प्रकार की वेश-भूषा के साथ वे अपने परमात्मा की कल्पना करते है। जैसे हम मनुष्य है तो परमात्मा को मनुष्य के रूप में देखत है। फिर जैसा देश वैसा परमात्मा का वेश । हम भारत वासियों के परमात्मा परम्पारिक परिधानों और आभूषणों से सुशजित होते है। शिर्ष पर मुकुट, कानों में कुन्डल, लम्बे केश, शिल्क के परिधान, सुन्दर नैन नक्श आदि। तो यदि हम ग्रीक या अन्य देशों के देवी देवाताओं पर नजर डाले तो उनके देवी देवताओं का रुप और परिधान वहाँ की संस्कृति के अनुरूप होता है। इसी परिपेक्ष में कल ही मैंने स्वामी शिवानंद जी की पुस्तक ' ईश्वर ' में भी इसी प्रकार परमात्मा के रूप के विषय में व्याख्या पड़ी।उन्होंने लिखा हम मनुष्य अत्यंत सीमित है। जैसे हम हैं और हमारे लिए जो सर्वोत्म चरित्र, आचरण, ...

मंत्र शक्ति

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किसी भी संप्रदाय में मंत्र शक्ति के महत्व को देखा गया है। क्रिश्चन, बौद्ध, मुस्लिम, जैन या सिख प्रतेक सम्प्रदाय के अनुयायि मंत्र का उच्चारण ईश्वर व सांसारिक इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए करते आये है। किन्तु सनातन धर्म में मंत्रो का प्रयोगआदिकाल से होता आया है। मंत्र क्या है ? किस प्रकार कार्य  करते है ? इनका क्या महत्व है ? इन सभी प्रश्नों के उत्तर हम इस लेख में खोजने का प्रयास करेंगे। आज इस कलयुग में मंत्रो के विषय में जानना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर युवाओं को ज़ो अपनी संस्कृति और जड़ों से दूर होते जा रहे है, पुनः जुड़ सके। मंत्र क्या है ? मंत्र का शाब्दिक अर्थ है मन को साधकर एक विशिष्ट ऊर्जा के आव्हान द्वार ईश्वर के समीप पहुंचना, उसे जानना। कुछ मंत्र है ज़ो सांसारिक कामनाओं से परे है तो अन्य मंत्र सांसारिक कामनाओं की पूर्ति के लिए किये जाते हो। कामनायें ज़ो भी हो किन्तु मन को साधे बिना मंत्र का उचित फल नहीं प्राप्त किया जा सकता, इसलिए मन को साधने हेतु जिन विशिष्ट ध्वनियों का उपयोग किया जाता है वह 'मंत्र' कहलाती है। मंत्र शक्ति किस प्रकार कार्य करती है... ? मंत्र शक...